कालसर्प पूजा कैसे करे?

 कालसर्प दोष किसी भी जातक की कुंडली पर उपस्थित होने पर जातक के जीवन में कई कष्टों को लेकर आता है | यह कष्ट जातक के आर्थिक, शारीरिक, मानसिक व वैवाहिक जीवन पर बहुत बुरा प्रभाव डालते है | जातक कई प्रयास के बाद भी किसी भी क्षेत्र में सफलता प्राप्त नहीं कर सकता | इसके बारें में विस्तार से जानने हेतु आप हमारी वेबसाइट पर पढ़ सकते हों |

आइए अब हम बात करते हैं काल सर्प योग पूजा की और जानते है  कि यह पूजा कैसे की जाती है।

जैसा की हम पहले भी यह बता चुके हैं कि कालसर्प योग की पूजा यदि त्र्यंबकेश्वर मंदिर में की जाए तो वह सर्वोत्तम है| काल सर्प पूजन कुछ विशेष तिथियों में किया जाता है। इसके लिए आप त्र्यंबकेश्वर मंदिर में पंडित  या विशेषज्ञों से संपर्क कर सकते हैं। पंडित द्वारा आपको एक विशेष तिथि जो कि आपकी राशि के अनुरूप होगी वह दी जाती है। मुख्य रूप से निम्नलिखित सामग्रियां कालसर्प योग दोष पूजन में प्रयुक्त होती हैं। फिर भी एक बार आप अपने पंडित या विशेषज्ञ से इस विषय में परामर्श अवश्य कर लें क्योंकि यह सामग्री पंडित या विशेषज्ञ के अनुसार कम या ज्यादा हो सकती हैं।

आप अपनी कुंडली पंडित अनुराग जी के साथ साझा कर कालसर्प पूजा कैसे करे सम्बंधित सारी जानकारी निशुल्क प्राप्त कर सकते हैं |

कालसर्प योग दोष पूजन सामग्री

1) श्री फल = 1
2) सुपारी = 11
3)लौंग = 10 ग्राम
4)इलायची = 10 ग्राम
5) पान के पत्ते = 7
6) रोली = 100 ग्राम
7) मोली = 5 गोली
8) जनेऊ = 11
9) कच्चा दूध =  100 ग्राम
10) दही = 100 ग्राम
11) देशी घी = 1 किलो ग्राम
12) शहद = 50 ग्राम
13) शक्कर = 500 ग्राम
14) साबुत चावल = 1 किलो 250 ग्राम
15) पंच मेवा = 250 ग्राम
16) पंच मिठाई = 1किलो ग्राम
17) ॠतु फल = श्रद्धा अनुसार
18) फूल माला,फूल = 5
19)धूप, अगरबत्ती =1-1 पैकेट
20) हवन सामग्री = 1किलो ग्राम
21) जौ = 500 ग्राम
22) काले तिल = 1 किलो ग्राम
23) कमल गठ्ठा = 20 रू
24) लाल चन्दन = 20 रू
25) पीली सरसों = 20 रू
26) गुग्गल = 20 रू
27) जटामसी = 20 रू
28) तिल का तेल = 1 किलो ग्राम
29) सूखा बेल गीरी = 20 रू
30)भोज पत्र = 20 रू
31)मिट्टी के बड़ा दीये = 2
32) मिट्टी के छोटे दीये =11
33) रूई = 1पैकेट
34) नव ग्रह समिधा = 1 पैकेट
35) गोला = 1
36) काली मिर्च = 100 ग्राम
37) पीला कपड़ा = सवा मीटर
38) कपूर = 11 टिक्की
39)लोहे की कटोरी = 1
40) दोने = 1 पैकेट
41) आम के पत्ते = 11पत्ते
42)आम की लकडियां = 5किलो ग्राम
43) साबुत उडद की दाल  = 250 ग्राम
44) लकड़ी की चौकी = 1
45) बेल पत्री = 11
46)शिव लिंग = 1
47) नाग = 9

कालसर्प योग दोष पूजन की विधि

कालसर्प योग 12 प्रकार के होते हैं और आपके कुंडली के दोष के अनुसार पंडित जी आपको आपको पूजा के लिए विशेष जानकारी दे सकते है | काल सर्प दोष पूजन के लिए आपको प्रातः 6: 00 बजे तक मंदिर में आना होगा। जातक को गोदावरी नदी में पवित्र स्नान करना होगा। केवल सफेद धोती और कुर्ते में पूजा करने का प्रावधान है।

 सर्वप्रथम पूजा आसन लगाया जाता है तत्पश्चात पूजा की थाली रखी जाती है जिसमें तीन धातु के सांप (तांबा या  सोना- चांदी) के रखे होते हैं। तीनों सांपों के आगे हल्दी के लेप से पान या आम के पत्तों से कोन के आकार की गणेश की प्रतिमा बनाकर स्थापित की जाती है। पंडित द्वारा मंत्रोचार के साथ भगवान गणेश जी की पूजा की जाती है,  तत्पश्चात वरुण भगवान के रूप में कलश पूजन किया जाता है इस पूजा में जल को भगवान का सम्मान दिया जाता है और पूजा जाता है| सभी पवित्र शक्ति जल ,सभी भगवान, देवी इस कलश के माध्यम से आमंत्रित किए जाते हैं।काल की मूर्ति स्थापित की जाती है तथा उसकी पूजा की जाती है। तत्पश्चात नवग्रहों की पूजा की जाती है।

कालसर्प पूजा कैसे करे

रुद्रम जप, महामृत्युंजय जप और राहु केतु ग्रह मंत्रों के साथ कालसर्प यंत्र को स्थापित किया जाता है| इसके पश्चात सांपों को दूध, पानी और शहद के द्वारा पवित्र स्नान कराया जाता है| स्नान के पश्चात सांपों को हल्दी चंदन कुमकुम तथा फूलों से सजाया जाता है| इसके पश्चात विष्णु सहशरम और नवनाग स्त्रोत्रम का जप करते हुए आशीर्वाद लिया जाता है। तत्पश्चात आटे का दिया बनाकर उसे घी के साथ जलाया जाता है तथा सांपों के सामने रखा जाता है। जातक नारियल, पान नाग देवता को चढ़ाता है और कपूर के दिए के साथआरती करता है, इस समय वह नाग देवता से प्रार्थना करता है कि उनके दुखों को दूर करें और उनके काल सर्प दोष को समाप्त करें।

कलश पर भगवान शिव की पूजा सभी अपराध और दुराचार की माफी के लिए की जाती है तथा काले तिल और घी के साथ हवन किया जाता है।  भगवान शिव पूजा करने के बाद सभी दोषों को नाश करते है। अनुष्ठान में देवी दुर्गा के 16 रूपों को महत्वपूर्ण अनुष्ठान के रूप में पूजा जाता है| उन धातु के सांपों को कुशावर्त कुंड में प्रवाहित कर दिया जाता है तथा कालसर्प यंत्र को जातक अपने साथ पूजा के लिए ले अपने घर ले जाता है और अंत में रुद्राभिषेक कर पूजा का समापन किया जाता है| पूजा समाप्त होने के पश्चात जातक प्रसाद गरीब लोगों में बांटता है।

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Pandit Satish Guruji is from trimbakeshwar, Nashik, and he lives in Trimbak behind Trimbakeshwar Temple with his family. Pandit ji performs all types of trimbakeshwar pooja like kaalsarp dosh puja, maha mrityunjay jaap, pitra dosh nivaran etc... Pandit ji is the Certified Kaalsarp Pandit Trimbakeshwar and his generations are giving consistent results according to the dosha found in people's horoscopes for more than 21 years. He has vast experience in the field of Dosh Nivaran Puja and can be established as the very famous Pandit of Trimbakeshwar.